प्रोजेक्ट 'कवच' के अंतर्गत उत्तराखंड के वन अधिकारियों को दिया गया अत्याधुनिक प्रशिक्षण
प्रोजेक्ट 'कवच' के अंतर्गत उत्तराखंड के वन अधिकारियों को दिया गया अत्याधुनिक प्रशिक्षण
अहमदाबाद/जेतलपुर (व्हाट्सएप- 8875863494). नरनारायण शास्त्री
इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी - इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस एंड साइबर सिक्योरिटी
ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है।
संस्थान द्वारा "KAWACH" (Knowledge for Advanced Wildlife
Analysis & Crime Handling) नामक तीन दिवसीय
गहन राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।
इस कार्यक्रम में उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी के रेंज
फॉरेस्ट ऑफिसर्स (RFOs) ने भाग लिया। इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन NSIT-IFSCS के प्रशिक्षण विभाग द्वारा प्रशिक्षण निदेशक डॉ. कल्पेश सोलंकी के
नेतृत्व में किया गया था।
कार्यक्रम का उद्घाटन गुजरात राज्य के
एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स श्री एस. के. श्रीवास्तव (IFS) (APCCF - रिसर्च एंड ट्रेनिंग) के कर-कमलों द्वारा किया गया। अपने संबोधन
में उन्होंने आधुनिक शिकारियों का सामना करने के लिए "तकनीक-आधारित
जांच" (Technology-enabled
investigations) पर जोर दिया। NSIT-IFSCS के प्रिंसिपल प्रो. शैलेश अय्यर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए
राष्ट्रीय स्तर के क्षमता निर्माण में संस्थान की भूमिका को स्पष्ट किया।
ट्रेनिंग विभाग द्वारा तैयार किए गए
पाठ्यक्रम में निम्नलिखित अत्याधुनिक विषयों को शामिल किया गया था। NSIT-IFSCS की रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) हेड डॉ. शिवानी
पंड्या ने इस वर्कशॉप को वैज्ञानिक दृष्टिकोण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शैक्षणिक सत्रों की शुरुआत करते हुए डॉ. पंड्या ने फोरेंसिक साइंस के मूलभूत
सिद्धांतों को समझाया और वन्यजीव अपराधों की जांच में इसके महत्व को अधिकारियों के
समक्ष स्पष्ट किया।
डॉ. परवेश शर्मा ने फील्ड
इन्वेस्टिगेशन पर तकनीकी प्रशिक्षण दिया। उन्होंने 'वाइल्डलाइफ क्राइम सीन मैनेजमेंट' पर सत्र लिए, जिसमें साक्ष्यों
को बिना दूषित किए सुरक्षित करने के तरीके सिखाए गए। उन्होंने फोरेंसिक फोटोग्राफी
का विशेष प्रशिक्षण भी दिया,
ताकि अधिकारी अदालत में मान्य तरीके
से अपराध स्थल का दस्तावेजीकरण कर सकें।
भारत में वन्यजीव फोरेंसिक को
संस्थागत बनाने वाले अग्रणी और दिग्गज डॉ. केशव कुमार, IPS (सेवानिवृत्त) पूर्व
पुलिस महानिदेशक एवं निदेशक,
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), गुजरात राज्य, के अत्यंत विस्तृत
और बौद्धिक रूप से प्रेरक व्याख्यान के साथ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अपने शिखर पर
पहुंच गया। डॉ. केशव कुमार ने 'जांचकर्ता की मानसिकता' (Investigator’s Mindset) के बारे में गहराई से बताते हुए इस बात पर जोर
दिया कि अपराध स्थल एक 'मौन कहानीकार'
होता है, जिसे समझने के लिए
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अटूट दृढ़ता की आवश्यकता होती है। उन्होंने वर्ष 2007 के विश्व प्रसिद्ध
गिर शेर शिकार मामले के माध्यम से अपने दर्शन को समझाया, जहां वन्यजीव अपराध
दृश्यों पर 'ह्यूमन फोरेंसिक'
के उनके क्रांतिकारी उपयोग ने संगठित
शिकारियों को सजा दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया। संदिग्धों के कपड़ों से खून के
नमूने एकत्र करके और उन्हें मारे गए शेरों के डीएनए से मिलान करके, साथ ही
फिंगर-प्रिंटिंग के साथ पदचिह्नों (पगमार्क) के विश्लेषण का उपयोग करके, उन्होंने प्रदर्शित
किया कि कैसे फोरेंसिक विज्ञान संदेह और दोषसिद्धि के बीच की दूरी को पाट सकता है।
प्रशिक्षु उनके 'आउट-ऑफ-द-बॉक्स'
दृष्टिकोण से गहराई से प्रेरित हुए, विशेष रूप से जिस
तरह से उन्होंने जंगल की जमीन को एक पारंपरिक अपराध स्थल के रूप में मानकर जांच की, जिससे 'बहेलिया' गिरोह के सदस्यों
की गिरफ्तारी हुई। अधिकारियों ने इस सत्र की अत्यधिक प्रशंसा की और कहा कि डॉ. केशव
कुमार के वास्तविक जीवन के केस अध्ययनों ने उन्हें न केवल कानून और विज्ञान सिखाया, बल्कि उनकी
विश्लेषणात्मक सोच में एक परिवर्तनकारी बदलाव भी पैदा किया—जिसने उनके
दृष्टिकोण को पारंपरिक गश्त से ऊपर उठाकर परिष्कृत, साक्ष्य आधारित आपराधिक जांच तक
पहुँचा दिया है।
डॉ. गौरांग सिंधव ने अधिकारियों को 'फोरेंसिक
एंटोमोलॉजी' (कीट विज्ञान) जैसे सूक्ष्म विषय से अवगत कराया। उन्होंने सिखाया कि
मृत जानवर के शरीर पर पाए जाने वाले कीटों और लार्वा की गतिविधि से मृत्यु का समय
(PMI - Post Mortem
Interval) और मृत्यु का कारण कैसे जाना जा सकता
है। प्राकृतिक मृत्यु और शिकार के बीच अंतर करने के लिए यह ज्ञान अत्यंत
महत्वपूर्ण है।
डॉ. कल्पेश सोलंकी ने "साक्ष्य
के रूप में DNA की भूमिका" विषय पर मास्टरक्लास ली। उन्होंने DNA का उपयोग करके
प्रजातियों की पहचान (Species
Identification) करने और अदालत में केस साबित करने के
लिए जैविक साक्ष्य (Biological Evidence) एकत्र करने की सटीक पद्धतियों के बारे में अधिकारियों को
प्रशिक्षित किया।
साइबर सुरक्षा विभाग के प्रमुख डॉ.
निकुंज ताहिलरामी और श्री विनय असेरी ने वन्यजीव अपराध विश्लेषण में साइबर फोरेंसिक
और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
के उपयोग पर प्रकाश डाला।
फोरेंसिक विभाग के फैकल्टी अनंत पाटिल
और अरोमल वेणुगोपालन के नेतृत्व में, कक्षा के बाहर अधिकारियों ने ग्रिड
सर्च (Grid Searches), क्राइम सीन घेराबंदी, अपराध स्थल फोटोग्राफी, वन्यजीव नमूनों का
संग्रह, पैकेजिंग, फॉरवर्डिंग और कस्टडी के रखरखाव जैसे व्यावहारिक अभ्यासों में भाग
लिया।
प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट अनुकूलित
सामग्री, व्यावहारिक हाथों-हाथ प्रयोगों और संसाधन व्यक्तियों द्वारा
उत्कृष्ट गुणवत्तापूर्ण प्रस्तुति की सराहना की, जिससे यह प्रशिक्षण एक शानदार सफलता
बन गया।
इस पूरे कार्यक्रम का सफल आयोजन
प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) शैलेश अय्यर और कैंपस डायरेक्टर संजय शर्मा के मार्गदर्शन
में किया गया था। आयोजन समिति के सदस्यों डॉ. गीता गुप्ता, डॉ. शिवानी पंड्या, डॉ. हरजीत सिंह, डॉ. खुशबू गौतम, डॉ. सचिन देव, डॉ. कुलदीप पुरोहित, अनंत पाटिल, और अरोमल
वेणुगोपालन, कृष्ण शर्मा और छात्र स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के
लिए कड़ी मेहनत की।
इस पहल के साथ, NSIT-IFSCS ने भारत में वन्यजीव फोरेंसिक प्रशिक्षण के लिए एक अग्रणी केंद्र
के रूप में अपना स्थान मजबूत किया है।


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