#Shivaratri आज का दिनः 2 अगस्त 2024, शिवरात्रि पर मिलेगा आध्यात्मिक प्रकाश!
भोलेनाथ सच्चे मन से की गई पूजा से प्रसन्न होते हैं इसलिए दिल से प्रार्थना करें...
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (व्हाट्सएप- 8875863494) -
* मासिक शिवरात्रि - 2 अगस्त 2024, शुक्रवार
* मासिक शिवरात्रि पूजा - 00:17 से 01:00, 3 अगस्त 2024
* कृष्ण चतुर्दशी प्रारम्भ - 2 अगस्त 2024 को 15:26 बजे
* कृष्ण चतुर्दशी समाप्त - 3 अगस्त 2024 को 15:50 बजे
* हर महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
* धर्मग्रंथों में शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है तथा यह शिवोपासना का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है।* धर्मग्रंथों के अनुसार देवी लक्ष्मी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती आदि देवियों ने शिवरात्रि व्रत किया था।* महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में भगवान भोलेनाथ लिङ्ग स्वरूप प्रकट हुए थे और पहली बार शिवलिंग की पूजा भगवान श्रीविष्णु और श्रीब्रह्मा ने की थी। * तब से महाशिवरात्रि, भगवान भोलेनाथ के प्रकटोत्सव स्वरूप मनाया जाता है तथा श्रद्धालु प्रतिमाह मासिक शिवरात्रि का व्रत करते हैं और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं।* शिवरात्रि पर पूजा-व्रत से आध्यात्मिक प्रकाश की प्राप्ति होती है।
श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग : 2 अगस्त 2024
* सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 19:14
* चन्द्रोदय 04:40, (3 अगस्त 2024) चन्द्रास्त 17:58
* शक सम्वत 1946, विक्रम सम्वत 2081
* अमान्त महीना आषाढ़, पूर्णिमान्त महीना श्रावण
* वार शुक्रवार, पक्ष कृष्ण, तिथि त्रयोदशी - 15:26 तक, नक्षत्र आर्द्रा - 10:59 तक, योग हर्षण - 11:45 तक, करण वणिज - 15:26 तक, द्वितीय करण विष्टि - 03:35, (3 अगस्त 2024) तक, सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि मिथुन - 05:41, (3 अगस्त 2024) तक
* राहुकाल 10:59 से 12:38
* अभिजित मुहूर्त 12:12 से 13:05
शुक्रवार चौघड़िया- 2 अगस्त 2024
* दिन का चौघड़ियाचर - 06:03 से 07:42
लाभ - 07:42 से 09:21
अमृत - 09:21 से 10:59
काल - 10:59 से 12:38
शुभ - 12:38 से 14:17
रोग - 14:17 से 15:56
उद्वेग - 15:56 से 17:35
चर - 17:35 से 19:14
* रात्रि का चौघड़िया
रोग - 19:14 से 20:35
काल - 20:35 से 21:56
लाभ - 21:56 से 23:17
उद्वेग - 23:17 से 00:39
शुभ - 00:39 से 02:00
अमृत - 02:00 से 03:21
चर - 03:21 से 04:42
रोग - 04:42 से 06:03
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
* मासिक शिवरात्रि - 2 अगस्त 2024, शुक्रवार
* मासिक शिवरात्रि पूजा - 00:17 से 01:00, 3 अगस्त 2024
* कृष्ण चतुर्दशी प्रारम्भ - 2 अगस्त 2024 को 15:26 बजे
* कृष्ण चतुर्दशी समाप्त - 3 अगस्त 2024 को 15:50 बजे
* मासिक शिवरात्रि पूजा - 00:17 से 01:00, 3 अगस्त 2024
* कृष्ण चतुर्दशी प्रारम्भ - 2 अगस्त 2024 को 15:26 बजे
* कृष्ण चतुर्दशी समाप्त - 3 अगस्त 2024 को 15:50 बजे
* हर महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
* धर्मग्रंथों में शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है तथा यह शिवोपासना का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है।
* धर्मग्रंथों के अनुसार देवी लक्ष्मी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती आदि देवियों ने शिवरात्रि व्रत किया था।
* महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में भगवान भोलेनाथ लिङ्ग स्वरूप प्रकट हुए थे और पहली बार शिवलिंग की पूजा भगवान श्रीविष्णु और श्रीब्रह्मा ने की थी।
* तब से महाशिवरात्रि, भगवान भोलेनाथ के प्रकटोत्सव स्वरूप मनाया जाता है तथा श्रद्धालु प्रतिमाह मासिक शिवरात्रि का व्रत करते हैं और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं।
* शिवरात्रि पर पूजा-व्रत से आध्यात्मिक प्रकाश की प्राप्ति होती है।
श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग : 2 अगस्त 2024
* सूर्योदय 06:03, सूर्यास्त 19:14
* चन्द्रोदय 04:40, (3 अगस्त 2024) चन्द्रास्त 17:58
* शक सम्वत 1946, विक्रम सम्वत 2081
* अमान्त महीना आषाढ़, पूर्णिमान्त महीना श्रावण
* वार शुक्रवार, पक्ष कृष्ण, तिथि त्रयोदशी - 15:26 तक, नक्षत्र आर्द्रा - 10:59 तक, योग हर्षण - 11:45 तक, करण वणिज - 15:26 तक, द्वितीय करण विष्टि - 03:35, (3 अगस्त 2024) तक, सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि मिथुन - 05:41, (3 अगस्त 2024) तक
* चन्द्रोदय 04:40, (3 अगस्त 2024) चन्द्रास्त 17:58
* शक सम्वत 1946, विक्रम सम्वत 2081
* अमान्त महीना आषाढ़, पूर्णिमान्त महीना श्रावण
* वार शुक्रवार, पक्ष कृष्ण, तिथि त्रयोदशी - 15:26 तक, नक्षत्र आर्द्रा - 10:59 तक, योग हर्षण - 11:45 तक, करण वणिज - 15:26 तक, द्वितीय करण विष्टि - 03:35, (3 अगस्त 2024) तक, सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि मिथुन - 05:41, (3 अगस्त 2024) तक
* राहुकाल 10:59 से 12:38
* अभिजित मुहूर्त 12:12 से 13:05
शुक्रवार चौघड़िया- 2 अगस्त 2024
* दिन का चौघड़िया
चर - 06:03 से 07:42
लाभ - 07:42 से 09:21
अमृत - 09:21 से 10:59
काल - 10:59 से 12:38
शुभ - 12:38 से 14:17
रोग - 14:17 से 15:56
उद्वेग - 15:56 से 17:35
चर - 17:35 से 19:14
लाभ - 07:42 से 09:21
अमृत - 09:21 से 10:59
काल - 10:59 से 12:38
शुभ - 12:38 से 14:17
रोग - 14:17 से 15:56
उद्वेग - 15:56 से 17:35
चर - 17:35 से 19:14
* रात्रि का चौघड़िया
रोग - 19:14 से 20:35
काल - 20:35 से 21:56
लाभ - 21:56 से 23:17
उद्वेग - 23:17 से 00:39
शुभ - 00:39 से 02:00
अमृत - 02:00 से 03:21
चर - 03:21 से 04:42
रोग - 04:42 से 06:03
काल - 20:35 से 21:56
लाभ - 21:56 से 23:17
उद्वेग - 23:17 से 00:39
शुभ - 00:39 से 02:00
अमृत - 02:00 से 03:21
चर - 03:21 से 04:42
रोग - 04:42 से 06:03
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

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