आज का दिनः 8 अगस्त 2024, हर-हर महादेव के साथ मंशाव्रत का संकल्प!

 #ManshaVrat आज का दिनः 8 अगस्त 2024, हर-हर महादेव के साथ मंशाव्रत का संकल्प!


- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (व्हाट्सएप- 8875863494)

* मंशाव्रत संकल्प - 8 अगस्त 2024, गुरुवार
* चतुर्थी प्रारम्भ - 22:05, 7 अगस्त 2024
* चतुर्थी समाप्त - 00:36, 9 अगस्त 2024

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।


* देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए मंशाव्रत का विशेष महत्व है.
* इस व्रत का संकल्प श्रावण चतुर्थी को लेकर, दीपावली के बाद आनेवाली उद्यापन चतुर्थी तक प्रति सोमवार को व्रत किया जाता है.
* कुछ श्रद्धालु आजीवन व्रत करते हैं.
* मंशाव्रत पूजा का सामान- चांदी का नाग, श्रीफल, लाल-सफेद वस्त्र, यज्ञोपवीत, देवी पार्वती के श्रृंगार का सामान आदि.
* प्रात:काल पवित्र स्नान के बाद सर्व प्रथम भोलेनाथ की पूजा अर्चना होती है और जलाभिषेक होता है, उसके बाद ही जल ग्रहण करते हैं.
* इस अवसर पर श्रीगणेश की पूजा होती है तथा माता पार्वती की पूजा के बाद श्रृंगार का सामान देवी को अर्पित करते हैं.
* शिवभक्त एक श्रीफल- नारियल भोलेनाथ को अर्पित करते हैं तो एक नारियल का प्रसाद वितरित करते हैं.
* इस दिन कुछ भक्त एक वक्त का भोजन ग्रहण करते हैं तो कुछ भक्त केवल दूध और लड्डू ही ग्रहण करते हैं.

विनायक चतुर्थी : श्रीगणेश की शुभ दृष्टि जीवन की सारी बाधाएं दूर करेगी!

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय, गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।
विघ्नों को दूर करनेवाले, वरदान देनेवाले, देवताओं के प्रिय, बड़े उदरवाले, सर्वजगत की रक्षा करनेवाले, हाथी सदृश्य मुखवाले, वेद और यज्ञ के आभुषण, देवी पार्वती के पुत्र, ऐसे हैं गणों के स्वामी श्रीगणेश, आपको नमस्कार हो, नमस्कार हो!

* विनायक चतुर्थी - 8 अगस्त 2024, गुरुवार
* चतुर्थी प्रारम्भ - 22:05, 7 अगस्त 2024
* चतुर्थी समाप्त - 00:36, 9 अगस्त 2024
* हर माह में शुक्ल पक्ष की, अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है, जबकि पूर्णिमा के बाद आने वाली यानी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।
* श्रीगणेश पूजा में शुद्ध भावना का विशेष महत्व है, इसलिए पवित्र मन से प्रार्थना करें, श्रीगणेश की शुभ दृष्टि जीवन की सारी बाधाएं दूर करेगी!
* श्रीगणेश चतुर्थी के अवसर पर श्री गणेश की आराधना जीवन में विजय की पताका फहराती है।
* इस दिन सच्चे मन से भगवान श्री गणेश की पूजा करें, लडुवन का भोग लगाएं, श्री गणेश कृपा की कामना के साथ दूब अर्पित करें, सामर्थ्य के अनुसार व्रत करें और संभव हो तो दान-पुण्य करें, कथा सुने..जीवन सफल हो जाएगा!
* जब हम कोई कार्य करते हैं तो उसका उद्देश्य होता है- विजय। जीवन में व्यक्ति हर समय विजय प्राप्त करने के लिए प्रयास करता है लेकिन विघ्न, विजय की राह में बाधा बनते हैं... श्रीगणेश की आराधना समस्त विघ्नों को समाप्त करती है और इसका सबसे अच्छा अवसर होता है हर माह की चतुर्थी!
* श्रीगणेश चतुर्थी का पूजा-पर्व भगवान श्रीगणेश को समर्पित है, चतुर्थी का व्रत हर महीने होता है, लेकिन सबसे मुख्य चतुर्थी का व्रत भाद्रपद के महीने में होता है, संपूर्ण विश्व में इसे गणेश चतुर्थी यानी भगवान गणेशजी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है!

श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग : 8 अगस्त 2024....

* सूर्योदय 06:05, सूर्यास्त 19:10
* चन्द्रोदय 09:11, चन्द्रास्त 21:32
* शक सम्वत 1946, विक्रम सम्वत 2081
* अमान्त महीना श्रावण, पूर्णिमान्त महीना श्रावण
* वार गुरुवार, पक्ष शुक्ल, तिथि चतुर्थी - 00:36, (9 अगस्त 2024) तक, नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी - 23:34 तक, योग शिव - 12:39 तक, करण वणिज - 11:19 तक, द्वितीय करण विष्टि - 00:36, (9 अगस्त 2024) तक
* सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि कन्या
* राहुकाल 14:16 से 15:54
* अभिजित मुहूर्त12:12 से 13:04

गुरुवार चौघड़िया- 8 अगस्त 2024....

* दिन का चौघड़िया
शुभ - 06:05 से 07:43
रोग - 07:43 से 09:21
उद्वेग - 09:21 से 11:00
चर - 11:00 से 12:38
लाभ - 12:38 से 14:16
अमृत - 14:16 से 15:54
काल - 15:54 से 17:32
शुभ - 17:32 से 19:10

* रात्रि का चौघड़िया
अमृत - 19:10 से 20:32
चर - 20:32 से 21:54
रोग - 21:54 से 23:16
काल - 23:16 से 00:38
लाभ - 00:38 से 02:00
उद्वेग - 02:00 से 03:22
शुभ - 03:22 से 04:44
अमृत - 04:44 से 06:06

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

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