#HariyaliAmavasya आज का दिनः रविवार, 4 अगस्त 2024, प्रथम पितृ नारायण देव की आराधना का विशेष अवसर- अमावस्या!
* हरियाली अमावस्या - रविवार, 4 अगस्त 2024 को
* अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 3 अगस्त 2024 को 15:50 बजे
* अमावस्या तिथि समाप्त - 4 अगस्त 2024 को 16:42 बजे
* अमावस्या पर विशेष व्यापारिक/सांसारिक कार्यों को विराम दिया जाता है क्योंकि यह धर्म कर्म... दानपुण्य का श्रेष्ठ अवसर होता है और इस मौके पर मन का भटकाव नहीं होना चाहिए!
* अमावस्या के अवसर पर प्रथम पितृ नारायण देव की आराधना समस्त पितृदोषों से मुक्ति प्रदान करती है!
* इस मौके पर ज्ञात-अज्ञात पितरों के प्रति जाने-अनजाने किए गए पाप-अपराध के लिए क्षमा मांगते हुए नारायण देव से उनकी उत्तम गति की प्रार्थना करें... पितरों के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि-सफलता आएगी!
* प्रथम पितृ नारायण देव की आराधना करें... ओम प्रथम पितृ नारायण देवेभ्यो नम:!
* अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 3 अगस्त 2024 को 15:50 बजे
* अमावस्या तिथि समाप्त - 4 अगस्त 2024 को 16:42 बजे
* अमावस्या पर विशेष व्यापारिक/सांसारिक कार्यों को विराम दिया जाता है क्योंकि यह धर्म कर्म... दानपुण्य का श्रेष्ठ अवसर होता है और इस मौके पर मन का भटकाव नहीं होना चाहिए!
* अमावस्या के अवसर पर प्रथम पितृ नारायण देव की आराधना समस्त पितृदोषों से मुक्ति प्रदान करती है!
* इस मौके पर ज्ञात-अज्ञात पितरों के प्रति जाने-अनजाने किए गए पाप-अपराध के लिए क्षमा मांगते हुए नारायण देव से उनकी उत्तम गति की प्रार्थना करें... पितरों के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि-सफलता आएगी!
* प्रथम पितृ नारायण देव की आराधना करें... ओम प्रथम पितृ नारायण देवेभ्यो नम:!
श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग : 4 अगस्त 2024
* सूर्योदय 06:04, सूर्यास्त 19:13
* शक संवत 1946, विक्रम संवत 2081
* अमांत महीना आषाढ़ पूर्णिमांत महीना श्रावण
* वार रविवार, पक्ष कृष्ण, तिथि अमावस्या - 16:42 तक, नक्षत्र पुष्य - 13:26 तक, योग सिद्धि - 10:38 तक, करण नाग - 16:42 तक, द्वितीय करण किंस्तुघ्न - 05:19, (5 अगस्त 2024) तक
* सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि कर्क
* राहुकाल 17:34 से 19:13
* अभिजीत मुहूर्त 12:12 से 13:04
रविवार चौघड़िया- 4 अगस्त 2024
* दिन का चौघड़िया
उद्वेग - 06:04 से 07:42
चर - 07:42 से 09:21
लाभ - 09:21 से 11:00
अमृत - 11:00 से 12:38
काल - 12:38 से 14:17
शुभ - 14:17 से 15:55
रोग - 15:55 से 17:34
उद्वेग - 17:34 से 19:13
* रात्रि का चौघड़िया
शुभ - 19:13 से 20:34
अमृत - 20:34 से 21:56
चर - 21:56 से 23:17
रोग - 23:17 से 00:38
काल - 00:38 से 02:00
लाभ - 02:00 से 03:21
उद्वेग - 03:21 से 04:43
शुभ - 04:43 से 06:04
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
श्री पीताम्बरा आश्रम में ‘एक शाम नन्दन के नाम’ भजन संध्या, भजनानन्दियों ने जमकर बरसाए भक्ति भाव और आनन्द-उल्लास के रस-रंग!
बांसवाड़ा. भक्ति आन्दोलन के पुरोधा, भजन लेखन एवं गायन जगत की स्वनामधन्य विभूति, एवं सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. देवकीनन्दन जोशी की तेरहवीं पुण्यतिथि पर श्री हनुमत चरित्र प्रचार समिति की ओर से श्री पीताम्बरा आश्रम में शुक्रवार रात ‘एक शाम नन्दन के नाम’ भजन संध्या खूब जमीं।
बांसवाड़ा में भजन गायन के माध्यम से प्रभु भक्ति का प्रवाह उमड़ाते रहने वाले जाने-माने भजन गायकों ने अपने संगीत गुरु पं. देवकीनन्दन जोशी द्वारा रचित एवं दशकों तक लोकप्रिय रहे उनके भजनों की लोकवाद्यों की संगत पर माधुर्यपूर्ण प्रस्तुतियों से भजन भक्ति गंगा बहाते हुए भावपूर्ण श्रृद्धान्जलि अर्पित की।
आधी रात तक चली इस सुमधुर भजन संध्या में किंकर कपिल जोशी, अमृतलाल सनाढ््य, गजेन्द्र पंड्या, माधव जोशी, नन्दकिशोर वैष्णव, सुशील त्रिवेदी, चन्द्रकान्त कंसारा, अशोक पालीवाल, विष्णु कंसारा, हितेश वैष्णव, हरीश पंचाल, संजय सेठिया एवं लोकेन्द्र पुरोहित ने गुरुजी रचित भजनों का गायन कर गुरु के प्रति कृतज्ञता अंजलि अर्पित की। इस दौरान कन्हैयालाल राव ने ढोलक, राजेन्द्र वैष्णव ने मंजीरे व अनुज कुमार तिवारी ने करताल पर संगत दी।
इससे पूर्व भजन गायकों ने हनुमान विग्रह की पूजा-अर्चना के उपरान्त आध्यात्मिक विभूति संतश्री स्वामी हरिहरस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज एवं जन-जन में लोकप्रिय रहे सुविख्यात संगीतकार पं. देवकीनन्दन जोशी की तस्वीर पर पुष्पहार अर्पित कर भजन संध्या का शुभारंभ किया।
भजन संध्या के उपरान्त श्री हनुमत चरित्र प्रचार समिति के संचालक किंकर कपिल जोशी ने हनुमान आरती विधान पूर्ण किया।
इस अवसर पर पुष्पान्जलि अर्पण एवं श्री भगवन्नाम संकीर्तन कार्यक्रम में मनोज वैष्णव, कुणाल भोई, मोहित जायसवाल, मशहूर रंगकर्मी जगन्नाथ तेली, पीताम्बरा शक्ति समूह की प्रतिनिधियों मधुबाला त्रिवेदी, पुष्पा व्यास, आशा जोशी, रचना व्यास, विजयलक्ष्मी शुक्ल, गायत्री मण्डल के संरक्षक पं. विद्यासागर शुक्ल, कार्यकारिणी सदस्य पं. अरुण व्यास, वास्तु परिषद के संयोजक पं. चन्द्रशेखर जोशी, पं. चन्द्रेश व्यास, पं. द्रोमिल त्रिवेदी, पं. अजय अधिकारी, पं. जय रणा, आश्रम के कार्यक्रम समन्वयक पं. मनोज नरहरि आर. भट्ट, रमेश रेवाशंकर भट्ट, पं. गिरीश जोशी ‘रामायणी’ सहित गायत्री मण्डल के पदाधिकारियों, आश्रम के साधक-साधिकाओं एवं भजनानन्दियों ने हिस्सा लिया।


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