बुधवार का सर्वार्थ सिद्धि योग नए व्यवसाय के लिए शुभ होता है!
#SarvarthaSiddhiYoga आज का दिनः 14 अगस्त 2024, बुधवार का सर्वार्थ सिद्धि योग नए व्यवसाय के लिए शुभ होता है!
बुधवार को सूर्योदय से चार चौघड़िये इस प्रकार हैं....
* पहला - लाभ (अच्छा)
* दूसरा - अमृत (अच्छा)
* तीसरा - काल
* चौथा - शुभ (अच्छा)
ज्योतिष शास्त्र में अनेक शुभ योग हैं, जो वार, तिथि, नक्षत्र के योग से बनते हैं और जो कार्य विशेष के लिए सर्वोत्तम होते हैं.
ऐसा ही योग है- सर्वार्थ सिद्धि योग, जो यदि बुधवार को हो तो नए व्यवसाय को प्रारंभ करने के लिए शुभ होता है.
सर्वार्थ सिद्धि योग हर वार के सापेक्ष तो विशेष फलदायी है ही, इस दौरान यह कार्य किए जा सकते हैं....
* नया व्यवसाय शुरू करना
* नया घर या वाहन खरीदना
* शुभविवाह
* शिक्षा आरंभ
* सुखद यात्रा
लेकिन.... सर्वार्थ सिद्धि योग के दौरान अपनी राशि का चंद्र और नक्षत्र फल देख लें तो ज्यादा अच्छा होगा!
* पहला - लाभ (अच्छा)
* दूसरा - अमृत (अच्छा)
* तीसरा - काल
* चौथा - शुभ (अच्छा)
ज्योतिष शास्त्र में अनेक शुभ योग हैं, जो वार, तिथि, नक्षत्र के योग से बनते हैं और जो कार्य विशेष के लिए सर्वोत्तम होते हैं.
ऐसा ही योग है- सर्वार्थ सिद्धि योग, जो यदि बुधवार को हो तो नए व्यवसाय को प्रारंभ करने के लिए शुभ होता है.
सर्वार्थ सिद्धि योग हर वार के सापेक्ष तो विशेष फलदायी है ही, इस दौरान यह कार्य किए जा सकते हैं....
* नया व्यवसाय शुरू करना
* नया घर या वाहन खरीदना
* शुभविवाह
* शिक्षा आरंभ
* सुखद यात्रा
लेकिन.... सर्वार्थ सिद्धि योग के दौरान अपनी राशि का चंद्र और नक्षत्र फल देख लें तो ज्यादा अच्छा होगा!
श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया : 14 अगस्त 2024
श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया
14 अगस्त 2024 इस प्रकार है....
* अमांत महीना श्रावण, पूर्णिमांत महीना श्रावण
* वार बुधवार, पक्ष शुक्ल, तिथि नवमी - 10:23 तक, नक्षत्र अनुराधा - 12:13 तक, योग इन्द्र - 16:06 तक, करण कौलव - 10:23 तक, द्वितीय करण तैतिल - 22:31 तक
* सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि वृश्चिक
* राहुकाल 12:37 से 14:14
* अभिजीत मुहूर्त - नहीं
बुधवार चौघड़िया 14 अगस्त 2024....
* दिन का चौघड़िया
लाभ - 06:08 से 07:45
अमृत - 07:45 से 09:22
काल - 09:22 से 10:59
शुभ - 10:59 से 12:37
रोग - 12:37 से 14:14
उद्वेग - 14:14 से 15:51
चर - 15:51 से 17:28
लाभ - 17:28 से 19:06
लाभ - 06:08 से 07:45
अमृत - 07:45 से 09:22
काल - 09:22 से 10:59
शुभ - 10:59 से 12:37
रोग - 12:37 से 14:14
उद्वेग - 14:14 से 15:51
चर - 15:51 से 17:28
लाभ - 17:28 से 19:06
* रात्रि का चौघड़िया
उद्वेग - 19:06 से 20:28
शुभ - 20:28 से 21:51
अमृत - 21:51 से 23:14
चर - 23:14 से 00:37
रोग - 00:37 से 02:00
काल - 02:00 से 03:22
लाभ - 03:22 से 04:45
उद्वेग - 04:45 से 06:08
शुभ - 20:28 से 21:51
अमृत - 21:51 से 23:14
चर - 23:14 से 00:37
रोग - 00:37 से 02:00
काल - 02:00 से 03:22
लाभ - 03:22 से 04:45
उद्वेग - 04:45 से 06:08
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!


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