सनातन धर्म-कर्म प्रचार अभियान....

 

#BhanuSaptami आज का दिनः 11 अगस्त 2024भानु सप्तमी- भगवान भास्कर की आराधना से मिलेगी प्रतिष्ठा! 


- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (व्हाट्सएप- 8302755688)

भानु सप्तमी को धर्मग्रंथों में बड़ा ही पवित्र दिन माना गया है। 
* रविवार के दिन सप्तमी तिथि होती है तो भानु सप्तमी कहलाती है। 
* इस अवसर पर भगवान भास्कर के निमित्त व्रत करते हुए उनकी उपासना करने से अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है।
* ताम्र के कलश में शुद्ध पवित्र जल भरकर तथा उसमें लाल चंदन, अक्षत, लाल रंग के फूल आदि डालकर भगवान भास्कर को अर्घ्य देना चाहिए।
* धर्मशास्त्रों में भानु सप्तमी के पर्व को सूर्य ग्रहण के समान प्रभावी बताया गया है, इसलिए इस दिन जप, होम, दान आदि करने पर उसका अनन्त शुभ फल प्राप्त होता है।
* जिनकी जन्म पत्रिका में सूर्यदेव अकारक हैं उन्हें इस अवसर पर गेहूं, स्वर्ण, गुड़ आदि का दान करना चाहिए।
* कार्य-व्यवसाय में प्रगति के लिए 1, 10, 19 और 28 जन्म दिनांक वालों को बंदरों को गुड़-चना देना चाहिए.
॥आरती श्री सूर्यदेव॥
जय कश्यप-नन्दन,ॐ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन,भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सप्त-अश्वरथ राजित,एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी,मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सुर - मुनि - भूसुर - वन्दित,विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर,दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सकल - सुकर्म - प्रसविता,सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन,भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
कमल-समूह विकासक,नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरतअति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
नेत्र-व्याधि हर सुरवर,भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत,परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सूर्यदेव करुणाकर,अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब,तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।

#Sunday श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया : 11 अगस्त 2024

श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया 11 अगस्त 2024 इस प्रकार है....

* शक सम्वत 1946, विक्रम सम्वत 2081
* अमान्त महीना श्रावण, पूर्णिमान्त महीना श्रावण
* वार रविवार, पक्ष शुक्ल, तिथि सप्तमी, नक्षत्र स्वाती, योग शुभ - 15:49 तक, करण गर - 18:53 तक, द्वितीय करण वणिज
* सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि तुला
* राहुकाल 17:30 से 19:08
* अभिजित मुहूर्त 12:11 से 13:03

रविवार चौघड़िया 11 अगस्त 2024 

* दिन का चौघड़िया
उद्वेग - 06:06 से 07:44
चर - 07:44 से 09:22
लाभ - 09:22 से 11:00
अमृत - 11:00 से 12:37
काल - 12:37 से 14:15
शुभ - 14:15 से 15:53
रोग - 15:53 से 17:30
उद्वेग - 17:30 से 19:08

* रात्रि का चौघड़िया
शुभ - 19:08 से 20:30
अमृत - 20:30 से 21:53
चर - 21:53 से 23:15
रोग - 23:15 से 00:37
काल - 00:37 से 02:00
लाभ - 02:00 से 03:22
उद्वेग - 03:22 से 04:45
शुभ - 04:45 से 06:07

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!


भक्त हो तो तुलसीदास जैसा, भक्ति रामचरितमानस जैसी!
* तुलसीदास जयंती - रविवार, 11 अगस्त 2024
* सप्तमी तिथि प्रारम्भ - 11 अगस्त 2024 को 05:44 बजे
* सप्तमी तिथि समाप्त - 12 अगस्त 2024 को 07:55 बजे
रामचरितमानस जन-जन का आदर्श धर्मग्रंथ है। जनसाधारण की भाषा और भावना का आकर्षक संगम है- रामचरितमानस! 
श्रीरामभक्ति ने तुलसीदास को धर्मजगत में जो स्थान और सम्मान दिया है वह किसी के लिए भी संभव नहीं है। कितना सुखद क्षण रहा होगा जब तुलसीदास के गुरु ने बचपन में ही उनका नाम- रामबोला रखा था! सत्य है- भक्त हो तो तुलसीदास जैसा और भक्ति हो तो रामचरितमानस जैसी!
तुलसीदास का जन्म संवत् 1554  श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन वर्तमान उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के राजपुर गाँव में हुआ। इनके पिता का नाम आत्माराम द्विवेदी तथा माता का नाम तुलसी था। जन्म लेते ही राम नाम का उच्चारण करने वाले तुलसीदास के जन्म के समय मुख में पूरे बत्तीस दांत थे। शायद पूर्व जन्म का अधूरा रहा भक्तिकर्म पूरा करने ही धरती पर आए थे- तुलसीदास!
इस बालक की विचित्र प्रतिभा से प्रभावित होकर माता-पिता ने उन्हे अपनी सेविका चुनिया को सौंप दिया। जब चुनिया देवलोक चली गई तो इस बालक पर अनंतानंद के शिष्य नरहरि आनंद की दृष्टि पड़ी और वे तुलसीदास को अपने साथ अयोध्या ले गए। नरहरि आनंद ने ही उनका नाम रामबोला रखा था। 
और भक्तिमार्ग पर चल दिए... तुलसीदास का विवाह रत्नावली से हुआ। वे अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते थे। एक बार उनकी पत्नी उनको बिना बताए अपने पीहर चली गई तो उसी रात छिपकर तुलसीदास भी ससुराल पहुंच गए। इस घटना से उनकी पत्नी को बहुत शर्मिंदगी का अनुभव हुआ और उन्होंने तुलसीदास से कहा कि- मेरा शरीर तो मिट्टी का पुतला है। जितना तुम इस शरीर से प्रेम करते हो यदि उससे आधा भी भगवान श्रीराम से करोगे तो इस संसार के मायाजाल से मुक्त होकर अमर हो जाओगे! 
उस सुवर्णक्षण के वचन ने तुलसीदास का जीवन ही बदल दिया और वे चल पड़े रामभक्ति की अनंत यात्रा पर!
तीर्थयात्रा के दौरान महावीर हनुमान की कृपा से उन्हें भगवान श्रीराम के दर्शन हुए और उसके बाद उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रीराम महिमा लेखन को अर्पित कर दिया।
रामचरितमानस तुलसीदास की प्रतिष्ठा है, पहचान है, लेकिन इसके अलावा उन्होंने अनेक जनभक्ति ग्रंथ- कवितावली, दोहावली, गीतावली, विनय पत्रिका आदि की भी रचना की। तुलसीदास का लेखन अवधी और ब्रज भाषा दोनों में मिलता है। जन-जन को सर्वाधिक प्रभावित करने वाले ग्रंथ रामचरितमानस की रचना प्रचलित लोकभाषा में दोहा, चौपाई, कविता, पद लेखन आदि जनप्रिय गीति शैली में हुई है। इसी जनप्रिय भाषा शैली ने रामचरितमानस और तुलसी दास को अमर कर दिया है!



Comments

Popular posts from this blog

अविस्मरणीय रहा विराट धार्मिक महोत्सव, लालीवाव पीठाधीश्वर ने जताया सभी का आभार....

#SankashtiChaturthi जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा!