बांसवाड़ा-डूंगरपुर-प्रतापगढ़ में रक्षाबंधन का मुहूर्त : 19 अगस्त 2024....

बांसवाड़ा-डूंगरपुर-प्रतापगढ़ में 

रक्षाबंधन का मुहूर्त!


- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी

* रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, इस शुभ अवसर पर बहनें अपने भाइयों को रक्षा-सूत्र बांधती हैं.
* रक्षा-सूत्र बांधने में शुभ-मुहूर्त से ज्यादा शुभ-भावना का महत्व है, इसलिए यदि आप शुभ-मुहूर्त नहीं देख पाएं, तो शुभ और पवित्र भावना के साथ रक्षा-सूत्र बांधें.
* शुभ-मुहूर्त की दृष्टि से देखें, तो अपराह्न का समय रक्षाबंधन के लिये  उपयुक्त माना जाता है, लेकिन भद्रा आदि के कारण से अपराह्न में शुभ-मुहूर्त उपलब्ध नहीं है, तो प्रदोष-काल का समय भी रक्षाबंधन संस्कार के लिये उपयुक्त माना जाता है.
* इस साल रक्षाबंधन 19 अगस्त 2024 को मनाया जा रहा है.

* रक्षाबंधन के दिन पूर्णिमा तिथि का समय इस प्रकार है....

* पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - 19 अगस्त 2024 को 03:04 बजे
* पूर्णिमा तिथि समाप्त - 19 अगस्त 2024 को 23:55 बजे
* रक्षाबंधन भद्रा अंत समय - 13:30
* रक्षाबंधन भद्रा पूँछ - 09:51 से 10:53
* रक्षाबंधन भद्रा मुख - 10:53 से 12:37

* रक्षाबंधन के अवसर पर राखी बांधने के लिए दो समय का सर्वथा त्याग करते हैं, पहला- भद्रा और दूसरा- राहुकाल, राहुकाल सवेरे ही समाप्त हो जाएगा, तो  बांसवाड़ा-डूंगरपुर में भद्रामुक्त समय इस प्रकार है....
* बांसवाड़ा-डूंगरपुर-प्रतापगढ़
रक्षाबंधन के लिये अपराह्न का मुहूर्त - 13:53 से 16:27
रक्षाबंधन के लिये प्रदोष काल का मुहूर्त - 19:02 से 21:15
  
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं. 
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

#Monday श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया : 19 अगस्त 2024


श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया 19 अगस्त 2024 इस प्रकार है....
* शक संवत 1946, विक्रम संवत 2081
* अमांत महीना श्रावण, पूर्णिमांत महीना श्रावण
* वार सोमवार, पक्ष शुक्ल, तिथि पूर्णिमा - 23:55 तक, नक्षत्र श्रवण - 08:10 तक, क्षय नक्षत्र धनिष्ठा - 05:45, (20 अगस्त 2024) तक, योग शोभन - 00:47, (20 अगस्त 2024) तक, करण विष्टि - 13:32 तक, द्वितीय करण बव - 23:55 तक
* सूर्य राशि सिंह, चन्द्र राशि मकर - 19:00 तक
* राहुकाल 07:46 से 09:23
* अभिजीत मुहूर्त 12:10 से 13:01

सोमवार चौघड़िया 19 अगस्त 2024....

* दिन का चौघड़िया
अमृत - 06:10 से 07:46
काल - 07:46 से 09:23
शुभ - 09:23 से 10:59
रोग - 10:59 से 12:36
उद्वेग - 12:36 से 14:12
चर - 14:12 से 15:49
लाभ - 15:49 से 17:25
अमृत - 17:25 से 19:02

* रात्रि का चौघड़िया
चर - 19:02 से 20:25
रोग - 20:25 से 21:49
काल - 21:49 से 23:12
लाभ - 23:12 से 00:36
उद्वेग - 00:36 से 01:59
शुभ - 01:59 से 03:23
अमृत - 03:23 से 04:46
चर - 04:46 से 06:10

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
आज का दिन....
https://palpalindia.com/aajkadin.php


इस्कॉन की ओर से श्री पीताम्बरा आश्रम में संकीर्तन सभा
श्रीकृष्ण भक्ति की सरिताओं ने किया मंत्रमुग्ध

बांसवाड़ा. गायत्री मण्डल की ओर से संचालित श्री पीताम्बरा आश्रम में इस्कॉन की बांसवाड़ा इकाई की ओर से शनिवार रात आयोजित संकीर्तन सभा ने श्रीकृष्ण भक्ति के रंग में रंगते हुए भागवत रसों की वृष्टि से श्रृद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महोत्सव के उपरान्त इस्कॉन के प्रतिनिधियों की ओर से आश्रम परिसर में सत्संग एवं संकीर्तन सभा हुई। इसमें लोकवाद्यों की धुनों पर महामंत्र का संकीर्तन एवं भावपूर्ण नृत्य दर्शन ने सभी को भावविभोर करते हुए श्रीकृष्ण प्रेमामृत सागर में गोते लगाने को मजबूर कर दिया।
इन सभी प्रतिनिधियों का गायत्री मण्डल की ओर से उपरणा पहना कर अभिनन्दन किया गया। इस्कॉन प्रतिनिधियों ने इस्कॉन के जन्माष्टमी उत्सव में हिस्सा लेने के लिए सभी भक्तों को आमंत्रित किया गया।

गायत्री मण्डल द्वारा विद्वान कर्मकाण्डी पण्डितों का सम्मान
वैदिक एवं पौराणिक परम्पराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय भागीदारी की सराहना


बांसवाड़ा. गायत्री मण्डल की ओर से श्री पीताम्बरा आश्रम में आयोजित अनुष्ठानिक कार्यक्रम में वैदिक एवं पौराणिक परम्पराओं के संरक्षण-संवर्धन के क्षेत्र में आत्मीय भागीदारी के लिए चार विद्वान कर्मकाण्डी पण्डितों का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ अभिभाषक लक्ष्मीकान्त त्रिवेदी, गायत्री मण्डल के मुख्य संरक्षक, पूर्व आयुक्त दिलीप गुप्ता, संरक्षक डॉ. दिनेश भट्ट एवं उपाध्यक्ष मनोहर जीएस जोशी ने कर्मकाण्ड एवं अनुष्ठानों के विशेषज्ञ विद्वानों पं. राकेश शुक्ला, पं. पवन पाठक, पं. आशीष पण्ड्या (पिण्डारमा) एवं वयोवृद्ध कर्मकाण्डी पं. देवशंकर जोशी को उपरणा पहना कर सम्मानित किया।
इन सभी का सम्मान गायत्री मण्डल के विभिन्न आयोजनों तथा प्रदोष महोत्सवों में निःशुल्क सहभागिता एवं आचार्यत्व कर्म निर्वहन करने के लिए किया गया।
इस दौरान् इन सभी विद्वानों की उल्लेखनीय भागीदारी के लिए सराहना की गई और मंतव्य व्यक्त किया गया कि प्राचीन वेद, कर्मकाण्ड आदि की परम्पराओं को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में हो रहे प्रयासों में इनका योगदान अहम् रहा है।
गायत्री मण्डल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ब्रह्मर्षि पं. दिव्यभारत पण्ड्या ने प्राच्यवि़द्याओं के प्रचार-प्रसार तथा इनसे संबंधित रचनात्मक गतिविधियों में कर्मकाण्ड के विद्वानों की उल्लेखनीय भूमिकाओं की प्रशंसा करते हुए नई पीढ़ी से पुरातन परम्पराओं से जुड़े ज्ञान एवं व्यवहारिक क्रियाविधियों का प्रशिक्षण पाकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

श्री पीताम्बरा आश्रम में श्रावणमासीय शनि प्रदोष महोत्सव धूमधाम से मना
शिवार्चन महानुष्ठानों ने उमड़ाया आध्यात्मिक आनन्द लहरियों का ज्वार


बाँसवाड़ा. गायत्री मण्डल की ओर से श्री पीताम्बरा आश्रम में श्रावणमासीय शनि प्रदोष महोत्सव पर रूद्रार्चन विधान, पंचदेव उपासना अनुष्ठानों एवं महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और भाव भक्ति धाराओं को प्रवाहित करते हुए शनिवार आधी रात तक आध्यात्मिक आनन्द लहरियों का अनुभव किया।
इस दौरान् जाने-माने कर्मकाण्डी पं. राकेश शुक्ला के आचार्यत्व में हुए रूद्राभिषेक अनुष्ठान में षोड़षोपचार से विभिन्न देवी-देवताओं सहित नर्मदेश्वर शिव की पूजा-अर्चना की गई तथा विभिन्न दिव्य एवं दैवीय द्रव्यों से प्राचीन वैदिक परम्परा के अनुरूप अभिषेक किया गया। मुख्य साधक के रूप में इन अनुष्ठानों के समस्त विधान मलय मनोहर जोशी एवं दृष्टि जोशी ने पूर्ण किए।

रूद्र ऋचाओं की स्वरलहरियों ने किया मंत्रमुग्ध

प्राच्यविद्यामर्मज्ञ ब्रह्मर्षि पं. दिव्यभारत पण्ड्या के सान्निध्य में हुए रूद्रार्चन महानुष्ठान में पं. आशीष पण्ड्या (पिण्डारमा), पं. पवन पाठक, पं. सुभाष भट्ट, पं. विद्यासागर शुक्ल, वयोवृद्ध कर्मकाण्डविद् पं. देवशंकर जोशी, पं. मनोहर हीरालाल जोशी, पं. मधुसूदन व्यास, पं. चन्द्रेश व्यास, पं. अनन्त जोशी, पं. अनिल पण्ड्या, पं. अरुण व्यास, पं. मनोज नरहरि भट्ट, पं. ओमप्रकाश व्यास, पं. ललित आचार्य, पं. अनिल एनएच भट्ट सहित दो दर्जन से अधिक साधक-साधिकाओं ने रूद्र महिमा ऋचाओं के सुमधुर गान का मनोहारी दिग्दर्शन कराया।

सामूहिक आरती एवं पुष्पान्जलि विधान

रूद्रानुष्ठानों के उपरान्त आरती एवं पुष्पान्जलि विधान में जाने-माने एड्वोकेट लक्ष्मीकान्त त्रिवेदी एवं यशपाल गुप्ता, गायत्री मण्डल के मुख्य संरक्षक दिलीप गुप्ता, पर्यावरणविद् डॉ. दिनेश भट्ट, मनोहर जोशी, विख्यात इंजीनियर अनन्त गुप्ता, मलय जोशी, राजेन्द्र जोशी, अरुण व्यास, पीताम्बरा शक्ति की सदस्याओं प्रीति गुप्ता, सरोज जोशी, कल्पना डिण्डोर, पुष्पा व्यास, विजयलक्ष्मी शुक्ल, रचना व्यास, दृष्टि जोशी, नीना गुप्ता, बबिता गुप्ता तथा इस्कान के प्रतिनिधियों एवं क्षेत्रवासी श्रृद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

इनकी रही उपस्थिति....

प्रदोष महोत्सव में महेन्द्र जोशी, गायत्री मण्डल के सचिव विनोद शुक्ल, कोषाध्यक्ष पं. विनय भट्ट एवं कार्यकारिणी सदस्य कमलकान्त भट्ट, शिक्षाविद् राजेन्द्र द्विवेदी, स्वाति गुप्ता, मोहित गुप्ता(पुणे), रमेश रेवाशंकर भट्ट, अजय अधिकारी, हीरेन पण्ड्या सहित गायत्री मण्डल के पदाधिकारीगण, सदस्य तथा आश्रम के साधक-साधिकाएं व क्षेत्रवासी उपस्थित थे।








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