श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया (17 अगस्त 2024) इस प्रकार है....

#Pradosh आज का दिनः 17 अगस्त 2024, शनिवार प्रदोष व्रत से संतान सुख की प्राप्ति होती है!
- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (व्हाट्सएप- 8302755688)
* प्रदोष व्रत - 17 अगस्त 2024, शनिवार (रात्रि 07:03 से 09:16)
* त्रयोदशी प्रारम्भ - 08:05, 17 अगस्त 2024
* त्रयोदशी समाप्त - 05:51, 18 अगस्त 2024
* त्रयोदशी प्रारम्भ - 08:05, 17 अगस्त 2024
* त्रयोदशी समाप्त - 05:51, 18 अगस्त 2024
* भोलेनाथ जब प्रसन्न होते हैं तो समस्त दोष समाप्त कर परम प्रसन्नता, परम सुख प्रदान करते हैं!
* प्रदोष व्रत-पूजा बहुत ही सरल है क्योंकि भोलेनाथ एकमात्र देव हैं जो पवित्र मन से की गई पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
* शिवोपासना में दुर्लभ मंत्र और कीमती पूजा सामग्री की जरूरत नहीं है, सच्चे मन से... नमः: शिवाय का जाप करें और शिवलिंग पर सर्वसुलभ पवित्र जल चढ़ाएं।
* सुख का अहसास कराता है- शांत मन और दुख का कारण है- अशांत मन, शिवोपासना से तुरंत मानसिक शांति प्राप्त होती है।
* प्रदोष व्रत में दिनभर निराहार रहकर सायंकाल पवित्र स्नान करने के बाद श्वेत वस्त्रों में शांत मन से भगवान शिव का पूजन किया जाता है।
* जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, प्रदोष व्रत को करने से हर प्रकार के दोष मिट जाते है।
* इस व्रत के प्रमुख देवता शिव हैं इसलिए उनके साथ-साथ शिव परिवार की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
विभिन्न दिनों के प्रदोष व्रत का अलग-अलग महत्व और प्रभाव होता हैै....
* शनिवार प्रदोष व्रत से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
* रविवार के दिन प्रदोष व्रत हमेशा स्वस्थ रखता है।
* सोमवार के दिन प्रदोष व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
* मंगलवार को प्रदोष व्रत रखने से ऋण-रोग से मुक्ति मिलती है।
* बुधवार के दिन यह व्रत करने सर्व कामना सिद्धि होती है।
* बृहस्पतिवार के प्रदोष व्रत से शत्रुओं का नाश होता है।
* शुक्रवार प्रदोष व्रत से सौभाग्य की वृद्धि होती है।
* संपूर्ण वर्ष प्रदोष व्रत संपूर्ण सुख प्रदान करता है!
* शुक्रवार प्रदोष व्रत से सौभाग्य की वृद्धि होती है।
* संपूर्ण वर्ष प्रदोष व्रत संपूर्ण सुख प्रदान करता है!
#Saturday श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया : 17 अगस्त 2024
श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया
17 अगस्त 2024 इस प्रकार है....
* अमांत महीना श्रावण, पूर्णिमांत महीना श्रावण
* वार शनिवार, पक्ष शुक्ल, तिथि द्वादशी - 08:05 तक, क्षय तिथि त्रयोदशी - 05:51, (18 अगस्त 2024) तक, नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा - 11:49 तक, योग प्रीति - 10:48 तक, करण बालव - 08:05 तक, द्वितीय करण कौलव - 19:03 तक, क्षय करण तैतिल - 05:51, (18 अगस्त 2024) तक
* सूर्य राशि सिंह, चन्द्र राशि धनु - 17:29 तक
* राहुकाल 09:22 से 10:59
* अभिजीत मुहूर्त 12:10 से 13:02
शनिवार चौघड़िया 17 अगस्त 2024
* दिन का चौघड़िया
काल - 06:09 से 07:46
शुभ - 07:46 से 09:22
रोग - 09:22 से 10:59
उद्वेग - 10:59 से 12:36
चर - 12:36 से 14:13
लाभ - 14:13 से 15:50
अमृत - 15:50 से 17:26
काल - 17:26 से 19:03
काल - 06:09 से 07:46
शुभ - 07:46 से 09:22
रोग - 09:22 से 10:59
उद्वेग - 10:59 से 12:36
चर - 12:36 से 14:13
लाभ - 14:13 से 15:50
अमृत - 15:50 से 17:26
काल - 17:26 से 19:03
* रात्रि का चौघड़िया
लाभ - 19:03 से 20:26
उद्वेग - 20:26 से 21:50
शुभ - 21:50 से 23:13
अमृत - 23:13 से 00:36
चर - 00:36 से 01:59
रोग - 01:59 से 03:23
काल - 03:23 से 04:46
लाभ - 04:46 से 06:09
उद्वेग - 20:26 से 21:50
शुभ - 21:50 से 23:13
अमृत - 23:13 से 00:36
चर - 00:36 से 01:59
रोग - 01:59 से 03:23
काल - 03:23 से 04:46
लाभ - 04:46 से 06:09
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
आज का दिन....
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श्री द्वारिकाधीश गौधाम वृंदावन परिसर में पार्थेश्वर चिंतामणि पूजन!
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
बांसवाड़ा. धर्मनगरी तलवाड़ा में त्रिपुरा सुंदरी मार्ग पर स्थित श्री द्वारिकाधीश गौधाम वृंदावन परिसर में श्रावण मास विशेष पार्थेश्वर शिवलिंग चिंतामणि पूजन- नवग्रह यंत्र पूजन एवं रुद्राभिषेक जारी है।
इसके तहत शुक्रवार को वासुदेव, कमला देवी त्रिवेदी ने सपरिवार धर्मलाभ लिया।
इसके तहत शुक्रवार को वासुदेव, कमला देवी त्रिवेदी ने सपरिवार धर्मलाभ लिया।
श्री द्वारिकाधीश गौधाम वृंदावन परिसर में पार्थेश्वर चिंतामणि पूजन प्रारंभ होने के अवसर पर संत रघुवीरदास महाराज ने श्रावण मास में पार्थेश्वर शिवलिंग के पूजन पर महत्व बताते हुए कहा था कि- पार्थेश्वर चिंतामणि प्रयोग हमारे सनातन धर्म का विशेष अनुष्ठान माना जाता है, जैसे पांच तत्वों से मिलकर हमारा शरीर बना है, उन पांच तत्वों से भगवान शंकर की उपासना करना, यही पार्थेश्वर चिंतामणि प्रयोग है, इसमें मिट्टी के शिवलिंग, जिसमें मिट्टी में सुगंधित द्रव्य चंदन इत्र आदि मिलाकर शिवलिंग की आकृति प्रदान करते हैं।
सतयुग में रत्न के शिवलिंग की पूजा होती थी, जैसे हीरा माणिक्य मोती आदि के शिवलिंग, उसके बाद त्रेता युग आया तो त्रेता युग में स्वर्ण शिवलिंग की महिमा कही गई और इसी तरह द्वापर युग में पारद के शिवलिंग की पूजा की जाती थी, परंतु कलयुग में पार्थेश्वर शिव पूजा से सभी प्रकार के शिवलिंगों की पूजा मानी जाती है। एक पार्थेश्वर शिवलिंग निर्माण कर उसकी पूजा करने से द्वादश ज्योतिलिंग पर रुद्राभिषेक करने का फल प्राप्त होता है। यह अनुष्ठान सभी प्रकार के संकट, रोगों का नाश करने वाला तथा तुष्टि पुष्टि आयु आदि की वृद्धि करने वाला है।
पूरे श्रावण महीने में हो रहे इस अनुष्ठान में नित्य एक से दो घंटा प्रतिदिन भक्ति भावना और उत्साह के साथ गौधाम में उपस्थित होकर शिवलिंग निर्माण कर पूजा का लाभ प्राप्त किया जा सकता है.
ऐसे तैयार करें भोलेनाथ के लिए गेंहू-गुड़-घी के लड्डू का प्रसाद!







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