आज का दिनः 12 अगस्त 2024, श्रावण सोमवार! क्या करें?
#ShravanSomvar आज का दिनः 12 अगस्त 2024, श्रावण सोमवार! क्या करें?
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
श्रावण मास में सोमवार का विशेष महत्व है, इस अवसर पर श्रद्धालु शिवमंदिर में जाकर भगवान भोलेनाथ को जल, दूध और गंगाजल चढ़ाकर उनकी पूजा करते हैं.
धर्मधारणा के अनुसार श्रावण सोमवार के दिन क्या करें....
* भगवान भोलेनाथ की पूजा करें.
* व्रत रखें, रुद्राभिषेक करें.
* जल, दूध और गंगाजल चढ़ाएं.
* बुरे विचारों का त्याग करें.
* झूठ नहीं बोलें.
* शराब-मांसाहार का त्याग करें.
जीवन में सुख दो तरह के होते हैं- भौतिक सुख और आध्यात्मिक सुख!
* विष्णुदेव भौतिक सुख प्रदान करते हैं तो भोलेनाथ आध्यात्मिक सुख प्रदान करते हैं।
* जब पवित्र मन से मन के देव महादेव शिव की पूजा करते हैं तो वे सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं
* भौतिक सुख महत्वाकांक्षा बढ़ाने वाला होता है, तो आध्यात्मिक सुख संतोष प्रदान करने वाला होता है।
* क्योंकि.... परम सुख व्यक्ति के अंदर मौजूद होता है, इसलिए अदृश्य होते हुए भी आध्यात्मिक सुख सर्वश्रेष्ठ होता है, जबकि भौतिक सुख दिखने के बावजूद समय सीमा में बंधा हुआ होता है।
* यदि पलंग भौतिक सुख है तो नींद आध्यात्मिक सुख, यदि चश्मा भौतिक सुख है तो दृष्टि आध्यात्मिक सुख, यदि अच्छा स्वास्थ्य आध्यात्मिक सुख है तो अच्छा अस्पताल भौतिक सुख!
* भौतिक सुख आध्यात्मिक सुख के सुप्रभाव में वृद्धि तो कर सकता है लेकिन आध्यात्मिक सुख के बगैर भौतिक सुख व्यर्थ है!
* भौतिक सुख का भोग आध्यात्मिक सुख की शुभ स्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए नियमित शिवोपासना इंसान को संपूर्ण सुख प्रदान करने वाली है, तन का सुख, मन को संतोष प्रदान करने वाली है।
* जीवन में हर क्षण शिवोपासना के लिए सर्वोत्तम है... महाशिवरात्रि, श्रद्धालुओं को प्रतिवर्ष शिवजी को प्रसन्न करने का शुभ अवसर प्रदान करती है... मासिक शिवरात्रि शिव भक्तों को प्रतिमाह शिवोपासना का सुख देती है... श्रावण मास, संपूर्ण माह शिव पूजा के लिए है... प्रति पखवाड़े प्रदोष पर शिवोपासना का सुंदर अवसर मिलता है, तो... सोमवार, प्रति सप्ताह भोलेनाथ की आराधना का प्रमुख दिन होता है, इसलिए... नियमित शिव पूजा नहीं कर पाएं, तो हर सोमवार को... हर-हर महादेव... का लाभ अवश्य लें!
* जब पवित्र मन से मन के देव महादेव शिव की पूजा करते हैं तो वे सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं
* भौतिक सुख महत्वाकांक्षा बढ़ाने वाला होता है, तो आध्यात्मिक सुख संतोष प्रदान करने वाला होता है।
* क्योंकि.... परम सुख व्यक्ति के अंदर मौजूद होता है, इसलिए अदृश्य होते हुए भी आध्यात्मिक सुख सर्वश्रेष्ठ होता है, जबकि भौतिक सुख दिखने के बावजूद समय सीमा में बंधा हुआ होता है।
* यदि पलंग भौतिक सुख है तो नींद आध्यात्मिक सुख, यदि चश्मा भौतिक सुख है तो दृष्टि आध्यात्मिक सुख, यदि अच्छा स्वास्थ्य आध्यात्मिक सुख है तो अच्छा अस्पताल भौतिक सुख!
* भौतिक सुख आध्यात्मिक सुख के सुप्रभाव में वृद्धि तो कर सकता है लेकिन आध्यात्मिक सुख के बगैर भौतिक सुख व्यर्थ है!
* भौतिक सुख का भोग आध्यात्मिक सुख की शुभ स्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए नियमित शिवोपासना इंसान को संपूर्ण सुख प्रदान करने वाली है, तन का सुख, मन को संतोष प्रदान करने वाली है।
* जीवन में हर क्षण शिवोपासना के लिए सर्वोत्तम है... महाशिवरात्रि, श्रद्धालुओं को प्रतिवर्ष शिवजी को प्रसन्न करने का शुभ अवसर प्रदान करती है... मासिक शिवरात्रि शिव भक्तों को प्रतिमाह शिवोपासना का सुख देती है... श्रावण मास, संपूर्ण माह शिव पूजा के लिए है... प्रति पखवाड़े प्रदोष पर शिवोपासना का सुंदर अवसर मिलता है, तो... सोमवार, प्रति सप्ताह भोलेनाथ की आराधना का प्रमुख दिन होता है, इसलिए... नियमित शिव पूजा नहीं कर पाएं, तो हर सोमवार को... हर-हर महादेव... का लाभ अवश्य लें!
#Monday श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया : 12 अगस्त 2024
श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग-चौघड़िया 12 अगस्त 2024
इस प्रकार है....
* शक संवत 1946, विक्रम संवत 2081
* अमांत महीना श्रावण, पूर्णिमांत महीना श्रावण
* वार सोमवार, पक्ष शुक्ल, तिथि सप्तमी - 07:55 तक, नक्षत्र स्वाती - 08:33 तक, योग शुक्ल - 16:26 तक, करण वणिज - 07:55 तक, द्वितीय करण विष्टि - 20:48 तक
* सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि तुला - 04:15, (13 अगस्त 2024) तक
* राहुकाल 07:44 से 09:22
* अभिजीत मुहूर्त 12:11 से 13:03
* अमांत महीना श्रावण, पूर्णिमांत महीना श्रावण
* वार सोमवार, पक्ष शुक्ल, तिथि सप्तमी - 07:55 तक, नक्षत्र स्वाती - 08:33 तक, योग शुक्ल - 16:26 तक, करण वणिज - 07:55 तक, द्वितीय करण विष्टि - 20:48 तक
* सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि तुला - 04:15, (13 अगस्त 2024) तक
* राहुकाल 07:44 से 09:22
* अभिजीत मुहूर्त 12:11 से 13:03
सोमवार चौघड़िया 12 अगस्त 2024....
* दिन का चौघड़िया
अमृत - 06:07 से 07:44
काल - 07:44 से 09:22
शुभ - 09:22 से 11:00
रोग - 11:00 से 12:37
उद्वेग - 12:37 से 14:15
चर - 14:15 से 15:52
लाभ - 15:52 से 17:30
अमृत - 17:30 से 19:07
अमृत - 06:07 से 07:44
काल - 07:44 से 09:22
शुभ - 09:22 से 11:00
रोग - 11:00 से 12:37
उद्वेग - 12:37 से 14:15
चर - 14:15 से 15:52
लाभ - 15:52 से 17:30
अमृत - 17:30 से 19:07
* रात्रि का चौघड़िया
चर - 19:07 से 20:30
रोग - 20:30 से 21:52
काल - 21:52 से 23:15
लाभ - 23:15 से 00:37
उद्वेग - 00:37 से 02:00
शुभ - 02:00 से 03:22
अमृत - 03:22 से 04:45
चर - 04:45 से 06:07
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!


Comments
Post a Comment