#Kalashtami आज का दिनः 25 जुलाई 2024कांपता है काल जिनसे... वो हैं काल भैरव!

- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (व्हाट्सएप- 8875863494)
* कालाष्टमी - 27 जुलाई 2024
* कृष्ण अष्टमी प्रारम्भ - 21:19, 27 जुलाई 2024
* कृष्ण अष्टमी समाप्त - 19:27, 28 जुलाई 2024

* जिस दिन भगवान शिव भैरव के रूप में प्रकट हुए थे, उसे कालभैरव जयन्ती कहा जाता है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है। इसलिए हर कृष्ण पक्ष की अष्टमी, कालाष्टमी कहलाती है। 
* इस दिन काल भैरव का दर्शन-पूजन सर्व मनोकामना पूर्ण करता है। इस दिन प्रातः पवित्र नदी-सरोवर में स्नान के बाद  पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके भैरव पूजा-व्रत करने से तमाम विघ्न समाप्त हो जाते हैं, दीर्घायु प्राप्त होती है।
* देवी भक्त कालाष्टमी के दिन काल भैरव के साथ-साथ देवी कालिका की पूजा-अर्चना-व्रत भी करते हैं। भैरव पूजा-आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षा और अकाल मौत से सुरक्षा भी होती है। 
* कालभैरव अष्टमी पर भैरव के दर्शन-पूजन मात्र से अशुभ कर्मों से मुक्ति  मिलती है, क्रूर ग्रहों के कुप्रभाव से छुटकारा मिलता है। 
* भोलेनाथ के भैरव स्वरूप की पूजा, उपासना करने वाले शिवभक्तों को भैरवनाथ की पूजा करके अर्घ्य देना चाहिए। 
* रात्रि जागरण करके शिव-पार्वती की कथा और भजन-कीर्तन करना चाहिए। भैरव कथा का श्रवण और आरती करनी चाहिए। 
* भगवान भैरवनाथ की प्रसन्नता के लिए उनके वाहन श्वान- कुत्ते को भोजन कराना चाहिए। 
* इस दिन प्रातः पवित्र नदी-सरोवर में स्नान करके  पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके भैरव-पूजा-व्रत करने से सारे विघ्न समाप्त हो जाते हैं। 
* अकाल मृत्यु से रक्षा होकर दीर्घायु प्राप्त होती है।
॥ श्री भैरव आरती ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले,कर जोड़ कर विनती करूँ।
कृपा तुम्हारी चाहिए,मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ।
मैं चरण छुता आपके,अर्जी मेरी सुन लीजिये॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
मैं हूँ मति का मन्द,मेरी कुछ मदद तो कीजिये।
महिमा तुम्हारी बहुत,कुछ थोड़ी सी मैं वर्णन करूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
करते सवारी स्वान की,चारों दिशा में राज्य है।
जितने भूत और प्रेत,सबके आप ही सरताज हैं॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
हथियार हैं जो आपके,उसका क्या वर्णन करूँ।
माता जी के सामने तुम,नृत्य भी करते सदा॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
गा गा के गुण अनुवाद से,उनको रिझाते हो सदा।
एक सांकली है आपकी,तारीफ उसकी क्या करूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
बहुत सी महिमा तुम्हारी,मेंहदीपुर सरनाम है।
आते जगत के यात्री,बजरंग का स्थान है॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
श्री प्रेतराज सरकार के,मैं शीश चरणों में धरूँ।
निशदिन तुम्हारे खेल से,माताजी खुश रहें॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
सिर पर तुम्हारे हाथ रख कर,आशीर्वाद देती रहें।
कर जोड़ कर विनती करूँ,अरु शीश चरणों में धरूँ॥
सुनो जी भैरव लाड़िले॥
श्री त्रिपुरा सुंदरी धर्म-कर्म पंचांग : 25 जुलाई 2024
* सूर्योदय 05:59, सूर्यास्त 19:18
* चन्द्रोदय 22:22, चन्द्रास्त 09:51
* शक संवत 1946, विक्रम संवत 2081
* अमांत महीना आषाढ़, पूर्णिमांत महीना श्रावण
* वार गुरुवार, पक्ष कृष्ण, तिथि पंचमी - 01:58, (26 जुलाई 2024) तक, नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद - 16:16 तक, योग शोभन - 07:49 तक, क्षय योग अतिगण्ड - 04:35, (26 जुलाई 2024) तक, करण कौलव - 15:17 तक, द्वितीय करण तैतिल - 01:58, (26 जुलाई 2024) तक
* सूर्य राशि कर्क, चन्द्र राशि कुम्भ - 10:45 तक
* राहुकाल 14:19 से 15:58
* अभिजीत मुहूर्त 12:12 से 13:05

गुरुवार चौघड़िया- 25 जुलाई 2024
* दिन का चौघड़िया
शुभ - 05:59 से 07:39
रोग - 07:39 से 09:19
उद्वेग - 09:19 से 10:59
चर - 10:59 से 12:39
लाभ - 12:39 से 14:19
अमृत - 14:19 से 15:58
काल - 15:58 से 17:38
शुभ - 17:38 से 19:18 
* रात्रि का चौघड़िया
अमृत - 19:18 से 20:38
चर - 20:38 से 21:59
रोग - 21:59 से 23:19
काल - 23:19 से 00:39
लाभ - 00:39 से 01:59
उद्वेग - 01:59 से 03:19
शुभ - 03:19 से 04:39
अमृत - 04:39 से 06:00 
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी : राम कृष्ण की माला दिलवा दे, वही सच्चा गुरु!


* चन्द्र शेखर मेहता (व्हाट्सएप- 9414397122)

बांसवाड़ा. जानामेडी स्थित उत्तम सेवा धाम में श्री पंच अग्नि अखाड़ा के महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी (ईश्वरानंद ) के आश्रम में गुरुपूर्णिमा के अवसर आयोजित सप्त दिवसीय आयोजन का समापन हुआl  गुरुदेव ने प्राचीन मन्दिर त्रिपुरा सुन्दरी के दर्शन, पूजन किया

हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए ध्यान योगी महर्षि उत्तम स्वामी जी ने  कहा   कि गुरु सत्ता सर्वोच्च सत्ता है। परमात्मा मनुष्य के हृदय में बैठा हुआ है। आज छदम गुरु घंटाल वेशधारी घूम रहे हैं। चमत्कार दिखा रहे हैं उनसे सावधान रहे। मीरा, कबीर, सूरदास, चारों शंकराचार्य, नामदेव, नानक, रामानुजाचार्य, रामकृष्ण परमहंस, इन सभी ने कभी अपने को भगवान घोषित नहीं किया। इन्होंने मार्ग दिखाए। गुरु ऐसे करना जो राम नाम व कृष्ण नाम की माला दे।

स्वामीजी ने कहा- आजकल ऐसी बातें चल रही है। यहां अनेक पार्टी के नेता बैठे हुए आप किसी भी राजनीति के पार्टी से है, मुझे कोई लेना देना नहीं, मैं आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कह रहा हूं मेरे सनातन धर्म पर उंगली उठाने वाले लोगों, मेरे राम, कृष्ण, शिव पर तुम को बोलने का अधिकार नहीं हैl हम संतों का काम, हमारा काम मार्गदर्शन करना है l मेरा काम आप लोगों के हाथ में राम कृष्ण की माला देना है।   

जो गुरु आत्म साक्षात्कार करा देवे ऐसे के साथ होना। गुरु सत्ता के प्रति समर्पण होना l जो सिद्ध है वह प्रसिद्ध नहीं है l उन्होंने कहा दो ऋण कभी नहीं उतर सकते ,एक मां का ऋण और दूसरा सतगुरु कार्य ऋण। संसार और साधना अलग है सद्गुरु संपत्ति की ओर नहीं साधना की ओर ले जाते हैं। ईश्वरीय सत्ता को स्वीकार करना सीखो

पंडित दिव्य भारत पंडया द्वारा हवन, गुरू पूजन अनुष्ठान किया गया। 

मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात व राजस्थान के बड़ी संख्या में भक्त गुरुदेव से आर्शीवचन के लिए आये। अखिल भारतीय गुरु भक्त मंडल के अध्यक्ष तपन भौमिक मंच ने स्वामीजी का जीवन परिचय सुनाया।

मंच पर सांसद सीपी जोशी, महेंद्र जीत मालवीय,,पूर्व सांसद कनकमल कटारा, आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक राजेन्द्र, श्रीवर्धन, गजेंद्र सिंह, निखिल त्रिवेदी, मनफूल भाई व समस्त गुरु भक्त उपस्थित थे। 

समारोह में गुरूदेव से आशीर्वाद लेने करीब 20000 भक्त  दूर दूर से आए l गुरू पूजन कर आशीर्वाद लिया l संचालन कवि सतीश आचार्य ने किया। अंत मे आरती व महाप्रसादी हुई। 2000 लोगो ने गुरुमंत्र दीक्षा ली।

त्रिपुरा सुन्दरी के दर्शन के बाद गुरूदेव विशेष विमान से  केकडी विधायक शत्रुघ्न गौतम के द्वारा राजस्थान सरकार द्वारा स्वीकृत 6.50 करोड़ रू की  परियोंजना के कार्यक्रम में सम्मिलित हुएl






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