जयपुर. खान विभाग ने औचक निरीक्षण के दौरान डूंगरपुर जिले में अलग-अलग स्थानों पर खनिज मेसेनरी स्टोन और खनिज क्वार्टज के दो लीज धारकों द्वारा ई-रवन्ना का दुरुपयोग करने का बड़ा मामला पकड़ा है। औचक निरीक्षण के दौरान प्रकरण सामने आने पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों पर कुल 19 करोड़ 68 लाख 27 हजार 996 रु. की शास्ति वसूली नोटिस जारी कर ई-रवन्ना बंद करने के साथ ही तुला यंत्र को भी डी-एक्टिवेट कर दिया है।
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा जो स्वयं खान मंत्री भी है के निर्देशों में विभाग अवैध खनन गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति से कार्य कर रहा है। खान सचिव श्रीमती आनन्दी और निदेशक माइंस भगवती प्रसाद कलाल द्वारा अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहकर अन्य कार्यों के साथ ही अवैध खनन गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मुख्य सचिव सुधांश पंत द्वारा जिला कलक्टर्स की अध्यक्षता में गठित एसआईटी समितियों की नियमित बैठक कर अवैध खनन गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई के निर्देश दिए हुए हैं।
उदयपुर सतर्कता विंग और सलूंबर कार्यालय की संयुक्त टीम द्वारा किये गये औचक निरीक्षण के दौरान उस्मानिया आसपुर की खनिज क्वार्टज माइनिंग लीज 7/2019 की चार पिटों पर केवल 2050 टन खनन ही पाया गया जबकि लीजधारक द्वारा 21 मई 2021 से 21 जुलाई 2024 के दौरान 137319.4 टन के 4076 ई-रवन्ना जारी कर विभागीय ई-रवन्ना का दुरुपयोग किया गया। लीज धारक द्वारा ई-रवन्ना का दुरुपयोग करते हुए 137319 टन खनिज का अन्य क्षेत्र से निगर्मन किया गया। विभाग द्वारा इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली 2017 के अनुसार 20 हजार कंपाउंड राशि सहित 18 करोड़ 40 लाख 31 हजार 190 रुपये की शास्ति वसूली नोटिस जारी कर तत्काल प्रभाव से ई-रवन्ना बंद कर दिया गया है।
एक अन्य कार्रवाई में उदयपुर सतर्कता व खनि अभियंता डूंगरपुर की संयुक्त टीम द्वारा गलियाकोट तहसील के घाटा का गांव में मेसेनरी स्टोन की लीज 5/2018 में मौके पर खनन कार्य बंद होने पर भी 2702 ई-रवन्ना जेनरेट कर 36505.16 टन खनिज का निर्गमन पाया गया। विभागीय टीम द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करते हुए एक करोड़़ 27 लाख 96 हजार 806 रुपये की शास्ति वसूली नोटिस जारी करने के साथ ही खान में स्थित तुलायंत्र को भी डी-एक्टिवेट किया गया है।
खान विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन गतिविधियों यथा अवैध खनन, भण्डारण, परिवहन और ई-रवन्नाओं के दुरुपयोग आदि पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
अग्निवीरों को राज्य पुलिस, जेल प्रहरी और वनरक्षक के रूप में मिलेगा आरक्षण
जयपुर. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कारगिल विजय दिवस (26 जुलाई) के अवसर पर सेना के अग्निवीरों के लिए घोषणा की है, उन्होंने कहा कि- समर्पण और राष्ट्र भक्ति की भावना से देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले अग्निवीरों के लिए राजस्थान सरकार ने राज्य पुलिस, जेल प्रहरी और वनरक्षक के रूप में आरक्षण का प्रावधान रखा है।
पांच वर्ष से अधिक समय से प्रतिनियुक्ति पर चल रहे अधिकारी-कर्मचारी भेजे जाएंगे मूल विभाग
* पट्टा जारी करने की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन, आवेदक को 30 दिन में मिल जाएगा पट्टा
* सफाईकर्मी भर्ती को पारदर्शी बनाया जाएगा
* राज्य के प्रमुख शहरों में इसी वर्ष से संचालित होंगी 500 ई-बसें
जयपुर. नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन राज्य मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि हमारी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' को मूल मंत्र मानकर राजस्थान के विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का कार्य कर रही है। कठिन परिश्रम से हम यह मुकाम हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि पट्टा जारी करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर आवेदक को 30 दिन में पट्टा देना सुनिश्चित किया जाएगा। सफाईकर्मी भर्ती को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा। श्री खर्रा ने कहा कि राज्य के प्रमुख शहरों में इसी वर्ष से 500 ई-बसें संचालित की जाएंगी।
झाबर सिंह खर्रा शुक्रवार को विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवासन विभाग (मांग संख्या-39) एवं स्वायत्त शासन विभाग (मांग संख्या-40) की अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने नगरीय विकास एवं आवासन विभाग की 89 करोड़ 7 लाख 12 हजार रूपये एवं स्वायत्त शासन विभाग की 1 खरब 23 अरब 66 करोड़ 97 लाख 92 हजार रूपये की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी।
नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन राज्य मंत्री ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों के सुझावों को शामिल करते हुए पट्टा जारी करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर पूर्ण पारदर्शी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पट्टे के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया आरंभ की जाएगी, जिसमें संबंधित निकाय आवेदन के 30 दिन के भीतर आवेदक को पट्टा जारी करेगा या निरस्त करेगा। उन्होंने कहा कि आवेदन में कोई कमी-खामी होने पर नगरीय निकाय एक सप्ताह की अवधि में उसकी जानकारी आवेदक को देगा। पट्टा निरस्त होने की स्थिति में आवेदक प्रशासनिक अधिकारियों की समिति के समक्ष पुनः आवेदन कर सकेगा। अगर गलत तरीके से पट्टा निरस्त करना पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
श्री खर्रा ने कहा कि जमीन मुआवजे के संबंध में गत 12 जुलाई को आदेश जारी कर पूर्व के आदेशों की खामियों को दूर किया गया है। उन्होंने कहा कि एक ही जोन में डीएलसी दर अलग-अलग हो सकती है, लेकिन आरक्षित दर एक ही होती है। नए आदेश में समतुल्यता लाते हुए मुआवजे का आधार डीएलसी दर को रखा गया है, जिससे अब कोई भी मुआवजे का नाजायज फायदा नहीं उठा सकेगा।
श्री खर्रा ने सफाईकर्मी भर्ती में वाल्मिकी समाज को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि पूर्व में सफाईकर्मी भर्ती में नगरीय निकायों में दो वर्ष कार्य अनुभव का प्रावधान था, जिसे बाद में एक वर्ष कर दिया गया। तत्पश्चात् निजी संस्थाओं के अनुभव को भी इसमें शामिल कर लिया गया, जिससे यह प्रक्रिया दूषित हो गई। अब सभी के सकारात्मक सुझावों को शामिल कर सफाईकर्मी भर्ती को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि विभाग से सम्बन्धित नियम-कानूनों में कोई खामी है तो उन्हें संशोधन कर दुरूस्त किया जाएगा। नगरीय निकायों की टाउनशिप पॉलिसीज को बदलकर इन्हें और बेहतर बनाया जाएगा। नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन राज्य मंत्री ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के मामलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अंतिम रूप से जमीन जिसके नाम थी, उसे मुआवजा मिले। वहीं यूडी टैक्स के सरलीकरण का भी प्रयास किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न राज्यों के यूडी टैक्स मॉडल का अध्ययन करने के लिए विभागीय अधिकारियों की टीम इन राज्यों के दौरे पर भेजी जाएगी।
नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन राज्य मंत्री ने कहा कि विभाग में कोई भी कर्मचारी यदि तीन वर्ष से अधिक अवधि से एक ही शाखा में कार्यरत है तो उसका दूसरी शाखा में तबादला किया जाएगा। साथ ही, यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी 5 वर्ष से अधिक समय से विभाग में प्रतिनियुक्ति पर है तो उसे मूल विभाग में भेजा जाएगा।
श्री खर्रा ने कहा कि तथ्यात्मक शिकायतें प्राप्त होने पर उनकी निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी कार्मिकों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर निकायों की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त होने पर उसे अतिक्रमण मुक्त करवाने का प्रयास किया जाता है।
श्री खर्रा ने कहा कि विभाग ने विगत सात महीनों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की है। इस अवधि में 30 हजार 408 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किये गए हैं। साथ ही, पुरानी स्वीकृतियों को मिलाकर कुल 43 हजार 141 आवासों का निर्माण प्रारम्भ करवाया गया है तथा 18 हजार 673 आवास पूर्ण कर दिये गए हैं। उन्होंने बताया कि 434 करोड़ की केन्द्रीय अनुदान राशि भारत सरकार से प्राप्त कर 378 करोड़ रुपये लाभार्थियों को वितरित कर दी गई है। वहीं, राज्य के प्रमुख शहरों में 500 ई-बसें संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया है, जो इसी वर्ष शुरू हो जाएंगी।
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